भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान पीड़ित की सटीक लोकेशन न मिल पाना एक बड़ी समस्या रही है, जिसे दूर करने के लिए Google ने देश में अपनी ‘इमरजेंसी लोकेशन सर्विस’ (ELS) को आधिकारिक तौर पर सक्रिय कर दिया है। इस तकनीक के जरिए इमरजेंसी कॉल के समय पीड़ित की लोकेशन GPS, वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क की मदद से कुछ मीटर की सटीकता के साथ कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जा सकेगी, जबकि पहले पारंपरिक सेल-टावर ट्रैकिंग में लोकेशन कई किलोमीटर तक फैली रहती थी। गूगल की यह सेवा घबराहट, अनजान जगह या बेहोशी जैसी स्थितियों में भी पुलिस और एम्बुलेंस को तेजी से घटनास्थल तक पहुंचने में मदद करेगी, जिससे कीमती समय बचेगा और अधिक जानें बचाई जा सकेंगी।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान सबसे बड़ी समस्या पीड़ित की सटीक लोकेशन का पता लगाना होती है। घबराहट, अनजान इलाका या बेहोशी जैसी स्थिति में व्यक्ति कंट्रोल रूम को सही पता नहीं बता पाता, जिससे एम्बुलेंस या पुलिस को घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हो जाती है और कीमती समय नष्ट होता है। इसी गंभीर चुनौती को ध्यान में रखते हुए गूगल ने भारत में एक नई इमरजेंसी लोकेशन सुविधा शुरू की है।
Google ने लॉन्च की Service
Google ने भारत में अपनी Emergency Location Service (ELS) यानी इमरजेंसी लोकेशन सर्विस लॉन्च कर दी है, जिससे 112 जैसे आपातकालीन नंबर पर कॉल या SMS करते ही आपकी सटीक लोकेशन सीधे पुलिस, एम्बुलेंस या अन्य रिस्पॉन्डर तक पहुँच जाएगी। यह फीचर Android फोन में इन-बिल्ट है और आपकी लोकेशन को GPS, Wi-Fi और मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से लगभग 50 मीटर की सटीकता तक पता कर सकता है, जिससे पहले से कहीं तेज मदद मिल सकेगी।
इसे सबसे पहले उत्तर प्रदेश में 112 सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करके लागू किया गया है, ताकि कहीं भी संकट में लोग अपनी जगह बताने में परेशानी न झेलें और रिस्पॉन्डर तुरंत पहुँच सकें। यह सेवा केवल तब एक्टिव होती है जब आप 112 डायल करते हैं और कोई अलग ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है।
मिलेगी सटीक लोकेशन
गूगल की यह नई सेवा एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में इन-बिल्ट सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो इमरजेंसी के समय स्वतः सक्रिय हो जाती है। भारत में जैसे ही कोई नागरिक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करता है, Emergency Location Service (ELS) बैकग्राउंड में चालू होकर कॉल करने वाले की सटीक लोकेशन आपातकालीन केंद्र तक पहुंचा देती है। यह तकनीक केवल जीपीएस पर निर्भर न रहकर वाई-फाई सिग्नल, मोबाइल नेटवर्क टावर और डिवाइस के आंतरिक सेंसर जैसे एक्सेलेरोमीटर से मिले डेटा के संयोजन का उपयोग करती है, जिससे ऊंची इमारतों या घनी आबादी वाले इलाकों में भी सही लोकेशन मिल पाती है।
सिस्टम होगा और मजबूत
गूगल की इमरजेंसी लोकेशन सर्विस (ELS) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह केवल इमरजेंसी कॉल के समय ही सक्रिय होती है, जिससे उपयोगकर्ता की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। कंपनी के अनुसार यह फीचर 24 घंटे ट्रैकिंग नहीं करता, बल्कि 112 जैसे आपातकालीन नंबर पर कॉल करते ही आपकी सटीक लोकेशन स्वतः साझा करता है और कॉल समाप्त होते ही बंद हो जाता है।
खास बात यह है कि लोकेशन डेटा गूगल के सर्वर पर न जाकर सीधे स्थानीय पुलिस या एम्बुलेंस के कंट्रोल रूम तक पहुंचता है। फिलहाल इस सेवा को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से की गई है। एंड्रॉयड 6.0 या उससे ऊपर के सभी स्मार्टफोन्स में, गूगल प्ले सर्विसेज अपडेट होने पर यह सुविधा उपलब्ध होगी।
