उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा की गरिमा, पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से इस वर्ष एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रशासन के अनुसार बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम परिसरों के भीतर मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। बीते कुछ वर्षों में रील और ब्लॉग बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण धार्मिक माहौल प्रभावित होने और श्रद्धालुओं की एकाग्रता में बाधा आने की शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं विवादों और अव्यवस्थाओं को रोकने के लिए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है, ताकि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और शांति के साथ दर्शन कर सकें।
उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से इस वर्ष एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रशासन के अनुसार बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम परिसरों के भीतर मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
चारधाम यात्रा में मोबाइल पर लगी रोक
चारधाम यात्रा पर जाने वालों के लिए बड़ी खबर है, उत्तराखंड सरकार ने इस साल चारों धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मंदिर परिसरों के भीतर मोबाइल फोन और कैमरा पूरी तरह प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है। अब श्रद्धालु मंदिर के अंदर फोन लेकर नहीं जा सकेंगे ताकि दर्शन के दौरान भीड़-भाड़, रील-वीडियो बनाने से होने वाली गड़बड़ी और व्यवस्थाओं में परेशानी को रोका जा सके। इस नियम के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर प्रवेश से पहले अपना मोबाइल और कैमरा जमा कराना होगा, और दर्शन के बाद बाहर ले जाने की अनुमति होगी। यह निर्णय यात्रा की पवित्रता बनाए रखने और दर्शन को सुगम और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
मंदिर की मर्यादा को मिली प्राथमिकता
गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में मंदिरों की मर्यादा को पहली प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि बदरीनाथ धाम में ‘सिंहद्वार’ से आगे मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, वहीं केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मंदिर परिसरों में भी श्रद्धालुओं को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। आयुक्त ने बताया कि दर्शन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए श्रद्धालुओं के मोबाइल सुरक्षित रखने हेतु मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की जाएगी।
यात्रा पंजीकरण में पुराना सिस्टम रहेगा लागू
यात्रा पंजीकरण व्यवस्था को लेकर फिलहाल पुराना सिस्टम ही लागू रहेगा, जिसके तहत कुल पंजीकरण में 60 प्रतिशत ऑफलाइन और 40 प्रतिशत ऑनलाइन कोटा निर्धारित किया गया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए डॉक्टरों की 15-15 दिन की रोटेशन ड्यूटी लगाई जाएगी और आपात स्थिति के लिए एयर एंबुलेंस की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों को 31 मार्च तक सड़कों की मरम्मत का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
दर्शन के लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर
पिछले वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जब 50 लाख से अधिक भक्त यहां पहुंचे थे। इसी अनुभव को देखते हुए इस वर्ष भी भारी भीड़ की उम्मीद जताई जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन “सुगम और सुरक्षित यात्रा” के लक्ष्य के साथ व्यापक तैयारियों में जुटा है, ताकि सभी भक्त बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
