भारत ने रचा हाइपरसोनिक इतिहास, DRDO मिसाइल का हुआ सफल परीक्षण; दुश्मनों में मची हलचल!

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Published On: 15 July 2025

नई दिल्ली | भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूती देते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी-लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (ET-LDHCM) का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल प्रोजेक्ट विष्णु के तहत विकसित की गई है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से कई गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। ET-LDHCM लंबी दूरी तक बेहद सटीकता से अपने लक्ष्य को भेद सकती है, जिससे यह दुश्मन के गहरे ठिकानों तक पहुंच सकती है। आधुनिक नेविगेशन और टारगेटिंग सिस्टम के कारण यह मिसाइल रणनीतिक लक्ष्यों पर अचूक वार करने में सक्षम है।

“यह एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसे ‘प्रोजेक्ट विष्णु’ के तहत डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो भारत के सबसे महत्वाकांक्षी और उन्नत मिसाइल कार्यक्रमों में से एक है।”

भारत की स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल: प्रोजेक्ट विष्णु की ताकत

भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक और बड़ी छलांग लगाई है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसे पूरी तरह से देश में विकसित तकनीक से तैयार किया गया है। यह मिसाइल प्रोजेक्ट विष्णु के अंतर्गत विकसित की गई है, जो भारत के सबसे उन्नत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मिसाइल कार्यक्रमों में से एक है।

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खासियत

  • इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाइपरसोनिक गति और लंबी मारक क्षमता है। यह मौजूदा सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस से कहीं अधिक तेज, सटीक और शक्तिशाली है। ब्रह्मोस को हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग किया गया था, जिससे इसकी क्षमता पहले ही सिद्ध हो चुकी है, लेकिन नई हाइपरसोनिक मिसाइल इससे भी कहीं आगे की तकनीक को दर्शाती है। इस उपलब्धि से भारत की स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक कैपेबिलिटी में जबरदस्त बढ़त मिली है और यह वैश्विक स्तर पर भारत को हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी क्लब का हिस्सा बना देती है।
  • यह मिसाइल ऐसे समय में विकसित की गई है, जब वैश्विक सुरक्षा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं — इजराइल-ईरान के बीच बढ़ता टकराव और भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तनाव इसकी ताज़ा मिसालें हैं। ऐसे संवेदनशील दौर में यह मिसाइल भारत की सुरक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है।
  • यह मिसाइल प्रणाली 1,000 से 2,000 किलोग्राम तक का पेलोड ढोने में सक्षम है, जिसमें पारंपरिक और परमाणु — दोनों प्रकार के हथियार शामिल हो सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज़मीन, समुद्र और वायु — तीनों माध्यमों से लॉन्च किया जा सकता है। युद्ध की स्थिति में यह मिसाइल अपनी दिशा बदलने में भी सक्षम है, जिससे यह दुश्मन की रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम को चकमा देने में बेहद प्रभावशाली साबित होती है।
  • हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से कम से कम 5 गुना तेज़ होती हैं। इतनी तेज गति से वायुमंडल में उड़ते समय अत्यधिक घर्षण उत्पन्न होता है, जिससे मिसाइल की सतह का तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस कारण इसके निर्माण में एडवांस्ड हीट-रेजिस्टेंट मटेरियल्स और थर्मल शील्डिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग होता है। वर्तमान में केवल रूस, अमेरिका और चीन के पास ऑपरेशनल स्तर पर हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक है। भारत यदि इस तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित करता है, तो वह इस विशिष्ट क्लब का चौथा सदस्य बन जाएगा।

रणनीतिक प्रभाव

इस परीक्षण के साथ भारत ने न केवल तकनीकी दृष्टि से एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को यह स्पष्ट संकेत भी दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग और सक्षम है। यह मिसाइल प्रणाली भारत की डिटरेंस स्ट्रैटेजी (निरोध रणनीति) को और मजबूत करती है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब सटीक और तेज़ी से दिया जा सकेगा।

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