देवभूमि उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा, चारधाम यात्रा पर लगी रोक; राहत और बचाव कार्य जारी

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Published On: 2 September 2025

देश | देवभूमि उत्तराखंड इस समय भारी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रही है। लगातार बारिश ने पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कों के कटाव और बादल फटने जैसी घटनाओं को जन्म दिया है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। सुरक्षा के मद्देनज़र, राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा को 5 सितंबर तक अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है।

देवभूमि उत्तराखंड इस समय प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन और सड़कों का कटाव हो गया है, राज्य सरकार ने आपात स्थिति को देखते हुए 5 सितंबर तक चारधाम की यात्रा रोकने का निर्णय लिया हैं।

चारधाम यात्रा पर लगी रोक

उत्तराखंड में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाओं ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले रास्तों को खतरनाक बना दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए राज्य प्रशासन ने चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है। गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि प्रदेश में कई स्थानों पर भारी भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो गई हैं और इन्हें युद्ध स्तर पर साफ किया जा रहा है। हालांकि, मौसम अनुकूल न होने और रास्ते पूरी तरह सुरक्षित न होने तक किसी भी यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे फिलहाल यात्रा की योजना टालें और मौसम सामान्य होने तक प्रतीक्षा करें।

 

राहत और बचाव कार्य जारी

उत्तराखंड में कई जगहों पर भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं। राज्य आपदा प्रबंधन बल, एनडीआरएफ और लोक निर्माण विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत वितरण और पुनर्निर्माण में जुटी हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने से आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसे जल्द बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

भारी बारिश के चलते यात्रा पर रोक

उत्तराखंड में यात्रा पर रोक 5 सितंबर तक लागू रहेगी, लेकिन यह पूरी तरह मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर बारिश थम जाती है और रास्ते सुरक्षित हो जाते हैं, तो यात्रा दोबारा शुरू की जा सकती है। राज्य सरकार इस समय लगातार मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क में है।

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