इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी से हुई मौतों के बाद जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराते हुए प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। यह प्रदर्शन उन परिवारों की पीड़ा को सामने लाने के लिए किया गया, जिनकी जिंदगियां दूषित पानी की वजह से उजड़ गईं।
NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। विरोध का तरीका अलग था, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट। प्रदर्शन के दौरान इंदौर महापौर के बैनर पर प्रतीकात्मक रूप से गोबर लगाया गया। संगठन का कहना था कि यह किसी व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जो साफ-सफाई और सुरक्षित जल आपूर्ति का दावा करती है, लेकिन हकीकत में नागरिकों को गंदा पानी परोस रही है।
इंदौर में विरोध
NSUI नेताओं ने स्पष्ट किया कि गोबर लगाने का आशय अपमान नहीं, बल्कि चेतावनी है। उनका कहना था कि जिस तरह गोबर से शुद्धिकरण का प्रतीक जुड़ा है, उसी तरह प्रशासनिक सोच और कार्यप्रणाली को भी शुद्ध करने की जरूरत है। संगठन का तर्क था कि जब पानी जैसी बुनियादी जरूरत ही सुरक्षित नहीं है, तो विकास के दावे खोखले नजर आते हैं। प्रदर्शन के दौरान आशुतोष चौकसे ने कहा कि शहर में लंबे समय से गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन जिम्मेदारों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का उदाहरण है। जब नागरिक अपनी जान गंवा रहे हों और सवाल पूछने पर सत्ता पक्ष के नेता बचते नजर आएं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
व्यवहार पर भी सवाल
NSUI ने यह मुद्दा भी उठाया कि दूषित पानी पर सवाल करने वाले पत्रकारों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया। संगठन का कहना था कि सवालों से भागना और मीडिया को डराने की कोशिश करना सच्चाई को दबाने का प्रयास है। छात्र संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसे हथकंडों से आवाजें शांत नहीं होंगी। प्रदर्शन के अंत में NSUI ने नगर निगम की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। संगठन ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
NSUI ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित पानी और नागरिकों के अधिकारों के लिए है। संगठन ने भरोसा दिलाया कि जब तक व्यवस्था जवाबदेह नहीं बनती, तब तक यह आवाज सड़क से लेकर सदन तक गूंजती रहेगी।
