अधूरी सड़क, पूरा टोल; राज्यसभा तक पहुंचा बैतूल-भोपाल हाईवे का मुद्दा

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Published On: 19 December 2025

MP के बैतूल-भोपाल नेशनल हाईवे (NH-46) पर अधूरे निर्माण के बावजूद टोल वसूली का मामला अब संसद के उच्च सदन तक पहुंच गया है। गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब सड़कें पूरी तरह तैयार नहीं हैं और यात्रा जोखिम भरी बनी हुई है, तब टोल वसूली जनता के साथ सीधा अन्याय है।

दिग्विजय सिंह ने सदन में कहा कि नितिन गडकरी को वे एक सक्षम और प्रभावी मंत्री मानते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। मंत्री स्वयं पहले बैतूल आकर सड़क की बदहाल स्थिति देख चुके हैं और अधिकारियों को फटकार भी लगा चुके हैं। इसके बावजूद टोल वसूली जारी रहना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर जिम्मेदारी कौन तय करेगा।

कुंडी टोल प्लाजा बना विवाद का केंद्र

पूरा विवाद शाहपुर के पास स्थित कुंडी टोल प्लाजा को लेकर है। बैतूल से इटारसी तक हाईवे के कई हिस्सों में जगह-जगह गड्ढे हैं, कहीं डामरीकरण अधूरा है तो कहीं निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में वाहन चालकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस टोल को हटाने या कम से कम वसूली रोकने की मांग कर रहे हैं। करीब 995 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली बैतूल-औबेदुल्लागंज फोरलेन सड़क का काम 2017 में शुरू हुआ था। ठेके के अनुसार इसे 2023 तक पूरा होना था, लेकिन सात साल बीतने के बाद भी परियोजना अधूरी है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी को अब तक तीन बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है।

गड्ढों से खतरा

हाईवे का बरेठा घाट क्षेत्र अब भी सिंगल लेन है और मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। भौंरा से इटारसी तक सड़क की हालत और भी खराब है, जहां कई जगह 5–5 फीट चौड़े गड्ढे बन चुके हैं। इटारसी के आसपास भी यातायात सिंगल लेन पर ही चल रहा है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। यात्रियों का कहना है कि सड़क पर न तो पर्याप्त साइन बोर्ड लगे हैं, न स्ट्रीट लाइट और न ही सर्विस रोड की व्यवस्था है। शाहपुर, भौंरा और पाढर जैसे इलाकों में रात के समय सफर और भी मुश्किल हो जाता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार बाघ कॉरिडोर के कारण करीब 21 किलोमीटर हिस्से में काम रुका हुआ है, फिर भी 21 मई 2025 से टोल वसूली शुरू कर दी गई।

नीति पर उठे सवाल

संसद में मामला उठने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार अधूरी और खराब सड़कों पर टोल वसूली को लेकर स्पष्ट और सख्त नीति बनाएगी। फिलहाल, आम लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि जब सड़क आधी-अधूरी है, तो टोल पूरा क्यों लिया जा रहा है।

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