MP में ठंड अपना सितम जारी रखे हुए है। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात तापमान एक बार फिर 5 डिग्री से नीचे जा पहुंचा। सबसे ज्यादा ठंड इंदौर में दर्ज हुई, जहाँ न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। खास बात यह रही कि इंदौर ने प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी को भी पीछे छोड़ दिया। पचमढ़ी का तापमान 4.8 डिग्री रहा। इंदौर में यह दिसंबर का 10 साल का सबसे कम तापमान दर्ज हुआ है।
भोपाल का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि ग्वालियर में 9.2 डिग्री रहा। उज्जैन 8.2 डिग्री और जबलपुर 8.5 डिग्री पर रहा। प्रदेश के लगभग सभी शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा। रायसेन में 5 डिग्री, रीवा 5.9, शिवपुरी 6, उमरिया 6.1, मलाजखंड 6.8, नौगांव 7.1, मंडला 7.3, खजुराहो 7.4 डिग्री रहा। रतलाम का पारा 9.2 डिग्री और गुना-श्योपुर 9.4 डिग्री दर्ज हुआ।
शीतलहर का अलर्ट जारी
मौसम विभाग का कहना है कि इस बार ठंड बढ़ने की एक बड़ी वजह जेट स्ट्रीम भी है। जमीन से करीब 12 किलोमीटर ऊपर 222 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बहने वाली यह तेज हवा उत्तर भारत में सक्रिय है। इसका प्रभाव मध्यप्रदेश तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा और जेट स्ट्रीम एक साथ सक्रिय हो जाएं तो तापमान तेजी से गिरता है और शीतलहर की स्थिति बन जाती है। यही कारण है कि गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में अलर्ट जारी किया गया है।
बर्फबारी का सीधा असर
हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी के बाद उत्तरी हवाएं काफी ठंडी हो चुकी हैं। यही बर्फीली हवाएं लगातार मध्यप्रदेश में प्रवेश कर रही हैं। बुधवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर और रायसेन में शीतलहर का असर साफ दिखा। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार ठंड कुछ ज्यादा ही तेज है। नवंबर में भोपाल की 84 साल पुरानी ठंड का रिकॉर्ड टूटा था, वहीं इंदौर में 25 साल का न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड ध्वस्त हुआ। दिसंबर में भी यही रुझान जारी है। इंदौर ने इस महीने 10 साल का न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
नवंबर की ऐतिहासिक ठंड
नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। बता दें कि 1931 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। 17 नवंबर को पारा 5.2 डिग्री तक गिरा, जो इतिहास में दूसरा सबसे कम तापमान रहा। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री तक जा पहुंचा था, जो 25 साल में सबसे ठंडी रात साबित हुई।
