सतना जिले के सकरिया स्थित धान उपार्जन केंद्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आईबी एसोसिएट वेयरहाउस में किसानों से धान खरीद के दौरान तौल में खुली गड़बड़ी की गई। जांच में सामने आया कि इलेक्ट्रॉनिक कांटों से छेड़छाड़ कर हर बोरी में तय मानक से कहीं अधिक वजन लिया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, उपार्जन के दौरान किसानों की धान बोरियों से 400 ग्राम से लेकर 2.4–2.5 किलो तक अतिरिक्त तौल किया गया। यह गड़बड़ी किसी एक-दो बोरियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े पैमाने पर की गई। किसानों को इसका अंदाजा भी नहीं लग पाया और वे लगातार नुकसान उठाते रहे।
तहसील स्तर पर कराई गई प्रारंभिक जांच के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा, तो खुलासा हुआ कि कुल 83,765 बोरियों में यह गड़बड़ी की गई। इन बोरियों से करीब 973 क्विंटल धान अतिरिक्त रूप से ले लिया गया। यह मात्रा इतनी बड़ी है कि सीधे तौर पर इसे संगठित लापरवाही या सुनियोजित वसूली माना जा रहा है।
23 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान
अतिरिक्त तौले गए धान की बाजार कीमत का आकलन करने पर यह सामने आया कि किसानों को करीब 23 लाख रुपये से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने सरकारी भरोसे पर अपनी फसल उपार्जन केंद्र में दी थी, वही किसान इस पूरे खेल का शिकार बने। इस पूरे मामले की शुरुआत रघुराजनगर तहसीदार द्वारा कराई गई जांच से हुई। रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर पंकज बोरसे (डीएम नान) ने स्वयं जांच कराई, जिसमें तौल व्यवस्था में की गई छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। इसके बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीर माना गया।
नागरिक आपूर्ति निगम
सूत्रों के अनुसार, जिस आईबी एसोसिएट वेयरहाउस में यह गड़बड़ी हुई, वह नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों से जुड़ा बताया जा रहा है। इससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है, क्योंकि सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों पर ही किसानों के शोषण के आरोप लग रहे हैं। मामला उजागर होने के बाद किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह मामला अब सिर्फ तौल की गड़बड़ी नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे से खिलवाड़ का प्रतीक बन गया है।
